रिजेक्शन सफर का अंत नहीं शुरुआत है

by | Jul 30, 2020 | Career and Profession, Lifestyle | 0 comments

करियर एंड प्रोफेशन में ऐसे अनेक मोड़ आते हैं जब आप बहुत लो फील करते हैं। खासतौर पर रिजेक्शन की हालत में। वैसे रिजेक्शन का होना अनेक कारणों पर निर्भर करता है। इससे आपका कॉन्फिडेंस भी कम हो जाता है। साथ ही आपकी सेल्फ एस्टीम पर भी असर होता है। लेकिन हम कहेंगे कि रिजेक्शन आपके करियर का अंत नहीं होता है। बल्कि ये तो एक बढ़िया शुरुआत होती है। यहीं से तो उस रास्ते तक पहुंचने की एक रोशनी दिखाई देती है जो आप देख नहीं पाते हैं। जिसने रिजेक्शन को दर किनार करके अपना रास्ता बना लिया वो जीत गया और जो मायूस हुआ वो हार गया। चलिए कुछ बातों की मदद से आपमें रिजेक्शन का डर खत्म किया जाए।

रिजेक्शन के बाद कि दुनिया को सोचें

मान लिया कि आपका रिजेक्शन हो गया, फिर क्या होगा? फिर होना तो ये चाहिए कि रिजेक्शन को दरकिनार करके आगे के जीवन के बारे में सोचा जाए। क्या आप दुखी होकर बैठे रहेंगे तो उससे आपको कोई फायदा होगा? बिलकुल नहीं, बल्कि आप अपनी बची हुई उम्मीद भी खो देंगे। आज किसी एक ने आपको रिजेक्ट किया है, आपके काम को नकारा है, इसका मतलब ये नहीं है कि सब खत्म हो चुका है। किसी एक व्यक्ति के नज़रिए से पूरी दुनिया को देखना सही नहीं है। आगे के जीवन के लिए उम्मीद को बनाये रखना सही होता है। अब आपको ये सोचना है कि अपनी मंज़िल पर आप कैसे पहुंच सकते हैं।

दुनिया के नज़रिए से रिजेक्शन को न देखें

जी हां रिजेक्शन आपका हुआ है, इनमें दुनिया को रिएक्ट करने का कोई हक नहीं। लेकिन जिस समाज में आप रहते हैं , वहां लोगों की धारणा इस तरह से काम नहीं करती है। एक सोच जो आपके बारे में लोग बना लेते हैं उसे आप कभी दूर नहीं कर सकते हैं। रिजेक्शन के बारे में लोग क्या सोचेंगे ये आपके दिमाग में चलता रहेगा तो आपको बहुत मुश्किल होगी। लेकिन जब रिजेक्शन का डर आपके मन से निकल जायेगा तो आपको किसी की भी परवाह नहीं रहेगी। तभी आप अपने आने वाले लक्ष्य को साध पाएंगे और खुश रह सकेंगे।

कॉन्फिडेंस को कभी न छोड़िए

आपका कॉन्फिडेंस आपकी सबसे बड़ी ढाल है। यदि रिजेक्शन के बाद आपका कॉन्फिडेंस भी खत्म हो जाता है तो फिर आपका आगे बढ़ना बहुत मुश्किल हो जाता है। कॉन्फिडेंस सक्सेस का एक सबसे बड़ा फैक्टर है। अगर आपमें कॉन्फिडेंस रहेगा तो आप किसी भी बड़ी समस्या का सामना कर सकते हैं। यदि रिजेक्शन हो भी जाता है तो आपका कॉन्फिडेंस आपको फिर से खड़ा कर देता है। रिजेक्शन कोई फाइनल जजमेंट तो है नहीं कि एक बार हुआ तो दोबारा आप कुछ नहीं कर सकते हैं। बस मन में ठान लीजिये और अपनी मंज़िल की तरफ कदम बढ़ाना फिर से शुरू कर दीजिए।

सेल्फ एस्टीम का होना है ज़रूरी

आपके साथ सेल्फ एस्टीम का होना बहुत ज़रूरी है। आपको बड़ा नाक वाला नहीं बनना है पर अपने सेल्फ एस्टीम को तो बनाकर रखना ही होगा। सेल्फ एस्टीम से आपका सही मूल्यांकन होता है। यदि आपका रिजेक्शन हो भी गया है तो शान्ति रखें। इसे सेल्फ प्राइड या सेल्फ एस्टीम का विषय न बनाएं। बल्कि अपने विवेक से काम लें और आगे के भविष्य के लिए अच्छा विचार करें। जो लोग रिजेक्शन को ढाल बनाकर आगे बढ़ते हैं जीवन में वही सफल होते हैं। साथ ही दूसरों के लिए वो एक बड़ा उदाहरण बन जाते हैं।

तो आप भी रिजेक्शन को एक असफलता न मानकर उसे अनदेखा करें। और बढ़ चले अपनी मंज़िल पर।

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