फाइनेंशियल सर्विसेज़ में महिलाएं स्वीकार रही हैं नई चुनौतियां

by | Dec 9, 2019 | Finance, Lifestyle | 0 comments

फाइनेंस वैसे तो हमेशा से पुरुषों के अधिकार क्षेत्र में आने वाला विषय है। लेकिन आज ऐसा कहना सरासर गलत है। भारतीय फाइनेंशियल सर्विसेज़ में पिछले दशक में लिंग-संतुलित कार्यबल की दिशा में काफी प्रगति की है। महिलाओं का इस क्षेत्र में बढ़ता दखल इस बात की स्पष्ट गवाही दे रहा है। लेकिन अभी भी एक लंबा रास्ता तय करना बाकी है। पेशेवर महिलाएं बहुत प्रतिभाशाली और मजबूत होती हैं। सही एडवाइस से वे अपने काम को बखूबी निभाती हैं। वे अपने काम में धैर्य और लचीलापन रखती हैं। स्ट्रेटेजी के साथ आगे बढ़ना और अपने लक्ष्य को पाना हर महिला के लिए ज़रूरी है। उत्कृष्टता की निरंतर खोज सभी महिलाओं के बीच एक आम विशेषता है। वे अपने पेशेवर नेटवर्क के ज़रिये दूसरों को भी सीखने और बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं। महिलाओं में मल्टीटास्किंग को करने की पूरी क्षमता होती है। ऐसी अनेक महिलाएं हैं जिन्होंने पेशेवर और व्यक्तिगत चुनौतियों का सामना किया है।

जैसे असमान वेतन, अवसरों की कमी, उत्पीड़न और बहुत कम महिला रोल मॉडल आदि और फिर भी विजयी हुई हैं। महिलाएं पुरुषों के मुकाबले अधिक एक्सप्रेसिव होती हैं। इसलिए वो अपने काम को और बेहतर तरीके से कर पाती हैं। हमारा मकसद पुरुषों की कार्यक्षमता या कार्यशैली पर उंगली उठाना नहीं है। लेकिन इन दिनों वीमेन आंत्रप्रेन्योर जिस काबिलियत के साथ भविष्य की दिशा तय कर रही हैं, वो काबिलेतारीफ है। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए श्रीमती वर्षा शर्मा का ये लेख पढ़िए, जो एलआईसी में एएओ के पद पर कार्यरत हैं।

शक्तिशाली और सफल महिलाएं जो फाइनेंशियल सर्विसेज़ से जुड़ी हैं

1. अरुंधति भट्टाचार्य: भारतीय स्टेट बैंक की पूर्व अध्यक्ष।
2. वृंदा जागीरदार: स्वतंत्र अर्थशास्त्री और भारतीय स्टेट बैंक की पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री।
3. शिखा शर्मा: एक्सिस बैंक की पूर्व प्रबंध निदेशक और सीईओ।
4. श्यामला गोपीनाथ: एचडीएफसी बैंक की अध्यक्ष।
5. अनुराधा राव: भारतीय स्टेट बैंक की सेवानिवृत्त उप प्रबंध निदेशक।

इन महिलाओं और उनके जैसी कई और महिलाओं ने रूढ़ीवादी मानसिकता को तोड़ा। दुनिया को दिखाया कि महिलाएं न केवल नेतृत्व कर सकती हैं, बल्कि वे वित्त को भी संभालने में अच्छी हैं। फाइनेंशियल सर्विसेज़ में महिलाओं का ऐसा दबदबा आगे बने रहने की संभावना भी है।

क्यों फाइनेंशियल सर्विसेज़ महिलाओं के लिए फायदेमंद है?

आपको बता दें कि फाइनेंशियल सर्विसेज़ में महिलाओं की भागीदारी हर लिहाज़ से फायदेमंद है। जिसने फाइनेंशियल सर्विसेज़ में सही तरह से प्रबंधन करना सीख लिया वो हर क्षेत्र में कमाल कर सकता है। वित्तीय क्षेत्र में यदि महिला और पुरुष दोनों मिलकर काम करें तो पूरा परिदृश्य बदला जा सकता है।

मल्टी-टास्किंग को बखूबी निभाती हैं महिलाएं

एक रिसर्च के अनुसार महिलाएं विश्लेषणात्मक और अंतर्ज्ञान के बीच संचार को संतुलित करती हैं। अर्थात, पुरुष एक समय में एक ही कार्य को सीखने और प्रदर्शन करने में बेहतर होते हैं। जबकि महिलाओं में बेहतर स्मृति और सामाजिक अनुभूति का कौशल होता है। इस क्षमता को मल्टीटास्किंग के नाम से जाना जाता है। महिलाओं को मल्टीटास्किंग और समूह के लिए समाधान बनाने में बेहतर माना गया है।

अनुसंधान से यह भी पता चलता है कि महिलाएं जटिल जानकारी को जल्दी से समझने में बेहतर हो सकती हैं। इसलिए फाइनेंशियल सर्विसेज़ में मल्टीटास्किंग उनके लिए आसान होता है।

भावनात्मक रूप से अभिव्यंजक

अनुसंधान कहता है कि महिलाएं भावनाओं को बेहतर तरीके से व्यक्त करती हैं। साथ ही सक्रिय रूप से संवाद करती हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि महिलाएं पुरुषों की तुलना में मौलिक रूप से अधिक भावुक होती हैं। लेकिन वे उन सकारात्मक और नकारात्मक भावनाओं को मुस्कुराते हुए या चेहरे की अन्य अभिव्यक्तियों के माध्यम से अधिक खुलकर दिखाती हैं। अच्छा और सक्रिय संचार संस्कृति को बेहतर बना सकता है। फाइनेंशियल सर्विसेज़ में यह टीम की भावना को मज़बूत कर सकता है, समस्याओं को उजागर कर सकता है, आदि।

रणनीति और निर्णय निर्माता होती हैं वीमेन आंत्रप्रेन्योर

अनुसंधान ने दिखाया है कि पुरुष अपने अहंकार को संतुष्ट करने के लिए महिलाओं की तुलना में अधिक जोखिम लेते हैं। यह अंतर तनावपूर्ण स्थितियों में अतिरंजित हो जाता है। जिसका अर्थ है कि किसी भी तनावपूर्ण स्थिति में, महिलाओं को चर्चा और निर्णय लेने में शामिल करना फायदेमंद है। वीमेन आंत्रप्रेन्योर के बारे में तो आपने सुना ही होगा। वही महिलाएं जो अपने बल पर किसी व्यापार को बढ़ा रही हैं। आजकल वीमेन आंत्रप्रेन्योर जैसे अपने काम को विस्तारित कर रही हैं वह हर लिहाज़ से प्रशंसा के लायक है।

महिला और पुरुष दोनों ही गणितीय और महत्वपूर्ण निर्णय लेते हैं। महिलाएं कम जोखिम वाली हो सकती हैं – लेकिन यकीनन पुरुषों की तुलना में अधिक सफल होती हैं। इस बात को आप आज की वीमेन आंत्रप्रेन्योर की सफलता से जोड़ सकते हैं।

सलाह लेना और नज़र रखना

पुरुष, एक निश्चित पद पर पहुंचने के बाद अति आत्मविश्वास में हो जाते हैं और कई बार सलाह और सुझाव लेने में उनके अहंकार को चोट लगती है। जबकि, महिलाएं किसी से सलाह लेने से नहीं डरती हैं। महिलाएं इस बात पर भी नजर रखती हैं कि फंड कहां से आ रहा है और कहां जा रहा है। यह कर्मचारी और नियोक्ता के बीच विश्वास का परिणाम है, यह एक सुरक्षित, खुश, स्वस्थ और तनाव मुक्त कार्यस्थल वातावरण भी बनाता है। फाइनेंशियल सर्विसेज़ में ये सब बहुत ज़रूरी है।

महिलाओं के पास आज अद्वितीय कौशल, प्रतिभा, अंतर्दृष्टि और राय हैं। यह उन मान्यताओं में से एक है जो सीखने और बढ़ने के लिए हमारी कंपनी की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है। आज की महिला कमजोर नहीं है, वह सशक्त है। वह सबको साथ लेकर चलने में विश्वास रखती थी, चाहे वह उसका घर हो या कंपनी जिसमें वह काम करती है।

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श्रीमती वर्षा शर्मा

श्रीमती वर्षा शर्मा

एलआईसी इंडिया में कार्यरत, एम.एस.सी केमेस्ट्री

स्वतंत्र लेखन, अनेक ख्यात पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन,आकाशवाणी में बतौर गायिका गीतों की प्रस्तुति

सिल्वर ओक्स कॉलोनी, अन्नपूर्णा रोड, इंदौर