इस तरह अपने बच्चे को दें टॉयलेट ट्रेनिंग

by | Jul 3, 2020 | Love & Life, Parenting | 0 comments

आपकी पैरेंटिंग समय के साथ चैलेंजिंग होती जाती है। जैसे-जैसे आपका बच्चा बड़ा होता है आपको उसके अनुसार उसे विभिन्न प्रकार से नई चीज़ें सिखाने की कोशिश करते हैं। अब जैसे टॉयलेट ट्रेनिंग को ही ले लीजिये। जी हां बड़े होते बच्चे के लिए ये ट्रेनिंग बहुत ज़रुरी हो जाती है। क्योंकि आप समय पर आदत नहीं डालते तो फिर बहुत तकलीफ होती है। बच्चे के लिए नैचरल कॉल को मैनेज करना बहुत मुश्किल हो जाता है। जैसे उसे कमोड के यूज़ में दिक्क्त आती है। वो कहीं भी टॉयलेट के लिए नहीं जा सकता। आपको हर वक्त चिंता बनी रहती है कि बच्चा अकेले कैसे मैनेज करेगा? इसके साथ ही आपको उसकी डाइट और रूटीन पर भी ध्यान देना होगा। जब बच्चा अपनी ट्रेनिंग को सही तरीके से करता है तो आपको उसे प्रेज़ भी करना चाहिए। ये सब कैसे हो सकता है आइये जानते हैं।

टॉयलेट ट्रेनिंग अहम हिस्सा है परवरिश का

जी हां अगर हम कहें कि टॉयलेट ट्रेनिंग आपकी पैरेंटिंग में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है तो शायद गलत नहीं होगा। ये भी माना कि टॉयलेट ट्रेनिंग इतनी आसान भी नहीं है। कई बार तो इसमें लगकर पैरेंट्स परेशान हो जाते हैं। लेकिन फिर भी मेहनत का फल तो मीठा ही होता है। क्योंकि जब बच्चा बड़ा होता जाता है तो टॉयलेट ट्रेनिंग का अभाव उसे खुद भी परेशान करता है। हो सकता है उसे बाहर के लोगों के सामने शर्मिंदा होना पड़े। या वो टॉयलेट जाने की आवश्यकता को शर्मिंदगी के कारण अनदेखा भी कर सकता है। इसलिए अपनी इस ज़िम्मेदारी को भी आप अच्छी तरह से निभाएं।

इस उम्र से करना चाहिए टॉयलेट ट्रेनिंग की शुरुआत

आपको ये जानना ज़रुरी है कि टॉयलेट ट्रेनिंग बच्चों को किस उम्र से दी जाये? देखिये बच्चा डेढ़ साल से चीज़ों को समझना शुरू कर देता है। तीन साल का होते-होते वह काफी कुछ जानने लगता है। यही वो समय है जब आप बच्चे को टॉयलेट ट्रेनिंग देना शुरू कर सकते हैं। लेकिन ये जान लीजिये कि लगातार आपको टॉयलेट ट्रेनिंग जारी रखना चाहिए। क्योंकि अगर आप एक-दो दिन भी बीच में छोड़ देंगे तो बच्चे को एक हैबिट में डालना मुश्किल हो जायेगा। लगातार टॉयलेट ट्रेनिंग से बच्चे को भी आदत होती जाएगी और आपकी परेशानी खत्म हो जाएगी।

पोर्टेबल कमोड का यूज़ करें

बच्चे को टॉयलेट ट्रेनिंग देते समय आप पोर्टेबल कमोड का यूज़ करें। क्योंकि नॉर्मल कमोड में बच्चा कम्फर्टेबले फील नहीं करता है। बच्चे को पोर्टेबल कमोड पर बैठने हो जाये तो आप एक रबर रिंग लगाकर उसे नॉर्मल कमोड पर भी बैठा सकते हैं। एक कोशिश आपको और भी करना होगी। ज़रुरी नहीं है कि आपको हर जगह वेस्टर्न टॉयलेट मिले। इसलिए अपने बच्चे को ऐसी ट्रेनिंग दें कि वह इंडियन टॉयलेट का यूज़ भी कर सके। वर्ना आपको बाहर जाने में बहुत समस्या आएगी।

बच्चे की डाइट और जीवनचर्या पर भी ध्यान दें

सिर्फ टॉयलेट ट्रेनिंग से कुछ नहीं होता है। आपको बच्चे की डाइट पर भी ध्यान देना होगा। क्योंकि बच्चा सही डाइट नहीं लेगा तो उसका पेट नहीं भरेगा। यदि पेट नहीं भरेगा तो वह फ्रेश भी नहीं हो पायेगा। इसलिए आप उसे सही समय पर पर्याप्त डाइट ज़रुर दें। कोशिश करें कि बच्चा ज़्यादा से ज़्यादा लिक्विड डाइट ले। इससे उसके पाचन में भी काफी मदद मिलेगी।

बच्चे की प्रशंसा करें

आपका बच्चा जब अपनी टॉयलेट ट्रेनिंग अच्छे से करता है तो उसे चीयर करें। इससे बच्चे का उत्साह बढ़ता है और वह अपनी ट्रेनिंग अच्छे से करता है। लेकिन आप उसे बार-बार डाटेंगे तो वह चिढ़ जायेगा और फिर लाख कोशिश के बाद भी वह टॉयलेट ट्रेनिंग पर ध्यान नहीं देगा। उसे प्यार से और खेल-खेल में आपको ये ट्रेनिंग देनी होगी।

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