पहली बार मां बनने जा रही हैं? अपनाएं ये बेबी केयर आइडियाज़

by | Nov 5, 2019 | Love & Life, Parenting | 0 comments

पेरेंटिंग शब्द जितना सुनने में अच्छा लगता है, आज़माने पर उतना कठिन है। मां बनने का अनुभव जितना सुखदायी है, उससे ज़्यादा नयी माताओं के लिये चिंता का विषय बन गया है। बेबी केयर को लेकर अक्सर उनके मन में प्रश्न उठते रहते हैं। उनका शिशु स्वस्थ है क्या? क्या वो अपने शिशु के लिये जो कर रही है, वो ठीक है? कोई शिशु को ब्रैस्टफीडिंग करवाने को कहता है, तो कोई गाय का दूध पिलाने को। कोई तो शहद या घुट्टी देने को? क्या करना चाहिये इस स्थिति में?

इन स्थितियों में हमे ये समझना ज़रूरी है कि कुछ चीज़ों का ध्यान बच्चे के जन्म से पहले रखना होगा। साथ ही सही प्रेग्नेंसी डाइट भी बच्चे के जन्म से पहले लेना ज़रूरी है। इन सब बातों के बारे में जानकारी दे रही हैं डॉक्टर पूजा अग्रवाल, जो आदित्य बिड़ला मेमोरियल हॉस्पिटल,पुणे में एक बाल रोग विशेषज्ञ हैं।

प्रसव के बाद बेबी केयर

बच्चे के शरीर का तापमान बना के रखना बहुत ज़रूरी है। बच्चे के हाथ-पैर व पेट का तापमान एक जैसा होना चाहिये। अगर बच्चा ठंडा है, तो वो चिड़चिड़ा हो सकता है या फिर दूध कम ले सकता है। बच्चे को जल्द गर्म करने के लिये अपने शरीर की गर्मी दें। बच्चे को मां या परिवार का कोई भी सदस्य अपनी छाती से लगाकर गर्म कर सकता है। और उसके बाद बच्चे को गर्म कपड़े में लपेटकर रख सकते हैं। जन्म के बाद ही बेबी केयर की मुख्य ज़रूरत होती है। अगर मां शिशु को अपने ही बिस्तर में सुलाती है, तो बच्चे का तापमान बना रहता है। पर बच्चा कम चिड़चिड़ा रहता है और दूध भी अच्छे से लेता है। बेबी केयर का ये टिप जन्म के कुछ समय बाद का है।

गर्भनाल भी बेबी केयर में होती है महत्वपूर्ण

शिशु और मां को जोड़ने वाली गर्भनाल को बच्चे के जन्म के बाद, काटकर सूखने के लिये छोड़ दिया जाता है। 5-10 दिनों में वो सूखकर झड़ जाती है। उस पर कुछ पॉउडर, गोबर या क्रीम लगाने की ज़रूरत नहीं होती। नहाने के बाद उसको सूती कपड़े से पोंछ लेना चाहिये, जिससे वो गीला न रहे और उसमें इन्फेक्शन न हो। अगर नाभी के आस-पास का हिस्सा लाल हो रहा हो तो शिशु को डॉक्टर को दिखायें। हो सकता है, वहां पस बन रहा हो।

प्रसव से पूर्व ध्यान रखें प्रेग्नेंसी डाइट का

खुद को स्वस्थ या साफ रखना बहुत ज़रूरी है। जिससे मां को कोई इन्फेक्शन न हो और वो होने वाले बच्चे तक न पहुंच पाए। किसी कड़ी में प्रेग्नेंसी डाइट का विशेष महत्व है। आपको बताएं कि प्रेग्नेंसी डाइट में भोजन का मतलब दो लोगों का खाना नहीं होता। प्रेग्नेंसी डाइट का अर्थ है सम्पूर्ण आहार। उसमें रोज़ एक फल शामिल करें। प्रोटीन की मात्रा बढ़ाने के लिये दाल, अंडा, मछली या कोई भी पका हुआ नॉन वेज लिया जा सकता है। पनीर में कैल्शियम और प्रोटीन की मात्रा अच्छी रहती है, जो होने वाले बच्चे के लिये महत्वपूर्ण है।

ब्रैस्टफीडिंग बहुत आवश्यक है

सामान्य प्रसव के बाद माँ शिशु को उसी समय अपना ब्रैस्टफीडिंग करवा सकती है। सर्जरी होने की स्थिति में मां 30-60 मिनट में ब्रैस्टफीडिंग शुरू करा सकती है। शुरू का दूध गाढ़ा, पीला, चिपचिपा होता है। मां को दूध तेज़ी से बन रहा होता है, पर अभी स्तन में भारीपन नहीं आता। ये गाढ़ा दूध बच्चे के लिये बहुत ख़ास होता है। उसकी कुछ घूटों में वो ही अंतर है, जैसा दो लड्डू में और एक कटोरी दाल-चावल में। वो कुछ बूंद बच्चे के लिये शुरू के दिनों में काफी रहते हैं।

एक सामान्य बच्चा चूसने की क्रिया के साथ जन्म लेता है। स्तन पर लगाने का काम मां करती है। बच्चे को ठीक से ब्रैस्टफीडिंग कराने के लिये मां कई तरीकों से शिशु को पकड़ सकती है। बच्चे को सिर्फ निप्पल नहीं पकड़ाना चाहिए। अपितु स्तन के काले भाग का काफी हिस्सा बच्चे के मुंह में जाना चाहिये। इससे दूध पिलाते हुये दर्द नहीं होगा और बच्चे का पेट ठीक से भरेगा।

स्नान-मालिश बेबी केयर में सबसे ज़रूरी

भारतीय संस्कृति में शिशु के मालिश को बहुत स्थान दिया गया है। यहां ये समझना जरूरी है कि मालिश का महत्व है न की तेल का। इसलिए जो तेल बच्चे के चमड़ी को सूट करे और जिसमें दाने न हों, वो तेल सही है। नारियल या ऑलिव ऑयल ज़्यादातर बच्चों के लिए अच्छा होता है। बच्चे की नानी-दादी-चाची भी मां के अलावा बच्चे की मालिश कर सकती है। मालिश हल्के हाथों से सहलाते हुए करनी चाहिये। बेबी केयर का सबसे बड़ा रूल है कि बच्चा आपके स्पर्श को पहचानें। बच्चे को सामान्य तरीके से नहलाएं। कोई शैम्पू या साबुन उसे न लगायें। साथ ही उसे अच्छे से पोंछें।

सामान्य समस्याएं जो बेबी केयर से जुड़ी हैं

पीलिया

हर बच्चे को थोड़ा पीलिया होता है पर मुश्किल से 40% बच्चों को ही इलाज लगता है।

अत्यधिक रोना

भूख के अलावा बच्चा गीला होने पे, सर्दी या गर्मी लगने पे रोता है। साथ ही त्वचा पर इरिटेशन होने पे, पेशाब या मल हो जाने से पहले रोता है। पेट में गैस बनने के कारण भी बच्चा बहुत रोता है।

ध्यान रखने की बातें

• बच्चे के जननांग की सफाई आगे से पीछे की तरफ करना चाहिये।
• कान या नाक में तेल न डालें।
• समय से बच्चे को टीकाकरण करवा के बच्चे को जानलेवा बीमारियों से बचायें।
• डायपर रैश से बचने के लिये डायपर की जगह सूती कपड़े की लंगोट पहनायें।
• अगर बच्चा नीला हो गया हो, छाती में सांस लेते गढ्ढे पड़ रहे हों, 6 घंटे तक दूध नहीं लिया। 8 घंटे तक पेशाब नहीं किया, हरी उल्टी हो, कहीं से खून आये तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र लेकर जायें।

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Dr. Pooja Agrawal

Dr. Pooja Agrawal

Consultant Neonatologist and Pediatrician

Consultant Neonatologist and Pediatrician, Aditya Birla Memorial Hospital, Pune