प्रीमेरिटल काउन्सलिंग कितनी ज़रूरीॽ | Can premarital counseling lowers the divorce rateॽ

by | Apr 9, 2019 | Love & Life, Relationships | 1 comment

जब हम कहते हैं ना कि उस अमुक लड़के या लड़की की शादी तय हो गई है तो बड़ा ही अच्छा लगता है। मन में एक ख़ुशी होती है कि चलो दो लोग जीवन की एक आनंदमयी शुरुआत करने वाले हैं। जब हम इतने खुश हैं तो ज़रा परिवार वालों के बारे में सोचियेॽ कितनी उत्सुकता होती है कि हमारे घर में अब शगुन के क्षण जल्दी ही आने वाले हैं। उत्सुकता और ख़ुशी तो होने वाले दूल्हा-दुल्हन के मन में भी होती है। लेकिन आने वाले जीवन के लिए थोड़ी घबराहट और आशंकाएं भी रहती हैं। बहुत बार यह आशंकाएं तलाक का कारण (Reason for Divorce) भी बन जाती हैं। ऐसे में यदि विवाह के पहले थोड़ी काउन्सलिंग ले ली जाये तो बेहतर होता है। खुशहाल शादीशुदा जीवन (Happy Married Life) के लिए काउन्सलिंग एक महत्वपूर्ण किरदार अदा करती है। आइये इसी संबंध में विस्तार से जानते हैं।

खुशहाल विवाह के लिए ज़रूरी है काउन्सलिंग (Happy Married Life)

जैसा आप जानते ही हैं कि विवाह दो परिवारों को एक कर देता है। वैसे लोग यह समझते हैं कि सारी समझाइश केवल लड़की के लिए होना चाहिए। अब देखिये समस्या यहीं से शुरू होती है। चूंकि दो परिवार जब एक होने वाले हैं तो समझदारी दोनों ओर से निभाना ज़रूरी है। चलिए पहले हम बात करें अरेंज मैरिज की। यह एक ऐसा रिश्ता है जो प्रयासों से मुक्कमल होता है, दूसरों के प्रयासों से। इसमें आप अपने पार्टनर के बारे में उतनी गहराई से नहीं जान पाते हैं। जो भी जानना होता है आप शादी के बाद ही जान सकते हैं। अब अगर हम लव मैरिज पर मूव करते हैं तो यहां कहानी कुछ अलग होती है। इसमें दोनों पार्टनर्स एक-दूसरे को पहले से जानते हैं, समझते भी हैं। लेकिन …. जी हां लेकिन फिर भी समस्याएं तो होती ही हैं। तो चाहे आप अरेंज मैरिज करें या फिर लव मैरिज काउन्सलिंग तो ज़रूरी है। तो हैप्पी मैरिड लाइफ (Happy Married Life) के लिए एक बार काउन्सलिंग ज़रूर करवाएं।

पार्टनर को समझना ज़्यादा ज़रूरी

परिवार के साथ तो हम देर सवेर घुल-मिल ही जाते हैं। लेकिन सबसे ज़्यादा ज़रूरी है अपने पार्टनर के साथ एक अच्छी समझ कायम करना। आखिर वही तो आपके साथ दूर तक चलने वाला सबसे भरोसेमंद साथी है। एक-दूसरे की पसंद, ना पसंद, विचार, दृष्टिकोण जानना बहुत आवश्यक है। पार्टनर्स जब एक-दूसरे के साथ खुश हैं तो फिर किसी और चीज़ की ज़रूरत ही कहां है। लेकिन जब आपके बीच समझ के तार ही न जुड़ सके तो फिर तो भगवान ही मालिक है।

क्या तलाक के कारण (Reason for Divorce) को प्रीमेरिटल काउन्सलिंग से कम किया जा सकता हैॽ

देखिये अब समय वैसा नहीं रहा जब रिश्तों को एक औपचारिकता की तरह लिया जाता था। इस बात का अर्थ यह है कि पहले रिश्तों को कैसी भी परिस्थितियों में निभाना ही पड़ता था। इसे एक मजबूरी कह लें या फिर सामाजिक परिपाटी। इस बात का यह मतलब नहीं निकाल लीजियेगा कि पुराने लोग रिश्तों का महत्व नहीं जानते थे, लेकिन यहां बात सिर्फ पति और पत्नी के रिश्ते की हो रही है। तलाक होने की वजह (Reason for Divorce) पर आप गौर करेंगे तो बात आपको समझ में आती जायेगी।

यदि आप ही चाहते हैं कि रिश्ते आपके लिए बोझ न बन जाये तो आपको प्रीमेरिटल काउन्सलिंग लेना ही चाहिए। इससे आपको संबंधों को बेहतर बनाने के लिए एक वैचारिक दृष्टिकोण मिलेगा, जो आपके रिश्तों में निखार लायेगा।

क्या होता है प्रीमेरिटल काउन्सलिंग मेंॽ

इस तरह की काउन्सलिंग में पहली शर्त यह होती है कि भावी पति-पत्नी को अकेले ही आना होता है। इसमें परिवार के किसी अन्य सदस्य को साथ आने की अनुमति नहीं होती है। देखा जाये तो बहुत बार कपल के बीच गलतफहमियां दूसरे लोगों के दखल से ही पैदा होती हैं।

इस काउन्सलिंग के दौरान आप शादी के रिश्ते को लेकर अपनी जिज्ञासा और प्रश्नों को पूछ सकते हैं। साथ ही विशेष परिस्थितियों में आपको किस तरह से अपने रिश्ते को संभालना है यह भी आप जान पाते हैं। इस दौरान सलाहकार के सामने आपको अपने मन की सारी उलझनों को बिना हिचकिचाए सामने रखना चाहिए। क्योंकि अगर बात दिल में रह गई तो उसका कभी भी सुलझ पाना मुश्किल होता है।

फिर काउंसलर अपने अनुभव और विशेषज्ञता के आधार पर कपल को सलाह देते हैं। वह हर उस संभावित परिस्थिति को समझाने का प्रयास करते हैं जो शादी-शुदा जिंदगी के लिए परेशानी का सबब बन सकती है। एक और बात जो आपके लिए जानना ज़रूरी है कि किसी भी मैरिज काउंसलर को चुनने से पहले आपको उसके बारे में पूरी जानकारी ले लेना चाहिए।

दूसरे भी आपके लिए बन सकते हैं मैरिज काउंसलर

जी हां यह बात बिलकुल सही है। ज़रूरी नहीं कि एक प्रोफेशनल काउंसलर ही आपके लिए सही हो। इसके लिए आप ऐसे लोगों की सलाह भी ले सकते हैं जिनका दाम्पत्य जीवन एक खूबसूरत मिसाल बनकर दूसरों को प्रेरणा दे रहा है। वह आपको इस रिश्ते की अहमियत को बहुत अच्छे से समझा सकते हैं। यह भी संभव है कि इस तरह के अटूट बंधन को देखकर आप भी प्रेरित हों। लेकिन यह भी जान लीजिये कि रिश्तों को ईमानदारी से निभाने के लिए आपको पूरी तरह से उन्हें संभालना सीखना होगा। इस तरह आप आनंदायक वैवाहिक जीवन (Happy Married Life) को बिताने के लिए तैयार हो सकेंगे।

दूसरों के लिए प्रेरणा बनें

क्या यह इतना मुश्किल हैॽ जी नहीं मनुष्य के लिए भला क्या मुश्किल। वह चाहे तो किसी भी काम को अंजाम दे सकता है। विवाह के इस सुंदर बंधन को ऐसी सकारात्मक लड़ियों से बांध दीजिये कि दूसरे भी कह उठें, रिश्ता हो तो ऐसा। यह सब-कुछ आप पर ही निर्भर करता है। अन्य लोगों को अपनी प्रेरणा बनाने से बेहतर है कि आप उनकी प्रेरणा बनें।

ध्यान रखिये पति-पत्नी प्रतिद्वंदी नहीं, सहभागी हैं। रिश्तों को निभाने की मजबूरी नहीं बल्कि उन्हें निभाने का उत्साह होना चाहिए, तभी तो वह महकने लगते हैं।

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