जीवंत रिश्तों का कत्ल करती पोर्नोग्राफी

by | Aug 17, 2019 | Love & Life, Relationships | 0 comments

लव एंड लाइफ हमारे जीवन के महत्वपूर्ण पहलू हैं। लेकिन इस विषय को लोग दूसरे तरीके से ही लेकर जाते हैं। तभी तो पोर्नोग्राफी जैसी असामाजिक और विचारहीन बुनियाद मज़बूत होती जा रही है। इससे समाज में क्राइम भी बढ़े हैं। अनेक स्थानों पर महिलाओं और बच्चों के साथ सेक्शुअल हरासमेंट की तादाद बढ़ रही है। साथ ही लोगों में सेक्शुअल डिज़ीज़ेस से जुड़ी समस्याएं भी सिर उठा रही हैं। विश्व में सूचना-प्रौद्योगी क्रांति द्वारा सूचनाएं सर्वसुलभ होने लगी हैं। तकनीक ने जहां एक ओर जीवन को नवीन जानकारी एवं संसाधनपूर्ण बनाया है। वहीं सामाजिक बुराईयों को भी नए कलेवर के साथ पेश किया है। ऐसी ही एक बुराई है जो आज बहुत व्यापकता के साथ समाज में पैर पसार रही है। वो है ‘पोर्नोग्राफी-अश्लील फिल्म एवं साहित्य’।

हर वर्ग का व्यक्ति है पोर्नोग्राफी की चपेट में

पोर्नोग्राफी की चपेट में न केवल युवा और प्रौढ़ हैं। बल्कि ये भारत के भविष्य यानि बच्चों को भी अपना शिकार बना रही है। टूटते घर, सिसकते रिश्ते, और बढ़ते अपराध आज इसकी देन हैं। भारतीय समाज एक मार्यादित समाज है, जिसकी नींव ‘प्रेम’ और ‘विश्वास’ पर टिकी है। इस समाज का मूल संस्कार ‘मर्यादा’ है। साथ ही इसकी सारी व्यवस्थाएं इसी आधार पर व्यवहारिक हैं। बदलते समय के साथ और तकनीक के बढ़ते प्रभाव में कई वर्जनाएं टूटीं। इसमें से एक अंतरंग विषय ‘यौन-व्यवहार’ भी था। हालांकि ये विषय बेहद निजी होने के कारण मुश्किल से चर्चा में आ पाता था। पर आज पोर्नोग्राफी जिस तरह से सभी के लिए सुलभ है, चिंता का विषय है।

इंसानियत को शर्मसार करती पोर्नोग्राफी

सच्चाई ये है कि बैडरूम की बंद दीवारों के अंदर हो रहे व्यवहार ‘निरंकुश’ होते चले गए। ‘प्रेम’ अब ‘वासना’ का खेल बन चुका था। इन्सान को जानवर बनाती पोर्नोग्राफी का दबदबा रिश्तों का गला घोंट रहा था। कुछ की क्लिक्स पर तकनीक के ज़रिए लगभग तत्काल और आसानी से उपलब्ध अश्लीलता व्यवहार का हिस्सा बनने लगी। जिसके कारण आज कई ज़िंदगियां बर्बाद हुई और कई नरक यातना को भोग रही हैं। स्त्री को ‘सेक्स की गुड़िया’ बनाकर भोगने वाली इस सोच ने इंसानियत को शर्मसार किया है इससे यौन क्राइम में बाढ़-सी आ गई।

सेक्सुअल हरासमेंट की बढ़ती तादाद

बिलखती गृहस्ती, उजड़े घर, कुचले स्वाभिमान और बढ़ते सेक्सुअल हरासमेंट के बीच उम्मीद की रोशनी के लिए हांफता समाज। आहिस्ते ही सही पर समाज में विसंगतियों के समाधान के प्रति दृढ़ इच्छा जागी है। डरी-सहमी एक नवविवाहित ने काउंसलर को अपनी आप बीती सुनाई। उसका पति पोर्नोग्राफी देख कर उससे जानवरों से भी बदतर बर्ताव पर उतर आया है। इस सेक्सुअल हरासमेंट से उसके स्वाभिमान पर गहरी चोट लगी है।

इस नरक से निकलने के लिए उसे उचित परामर्श चाहिए। विषय की गंभीरता को समझते हुए परामर्श केंद्र ने दोनों युगलों की काउंसलिंग की। कई दिनों के सुझाव, परामर्श और निगरानी के बाद अंतः समस्या का समाधान हुआ। इस तरह एक परिवार टूटने से बच गया। इस तरह सेक्सुअल हरासमेंट की बढ़ती संख्या को रोका जा सकता है।

सेक्शुअल डिज़ीज़ेस भी पसार रही है पैर

दरअसल समस्या ये है कि इस लत को ठीक तरह से समझा जाए। पोर्नोग्राफी के नशे का आदि व्यक्ति फेंटेसी की दुनिया में ही रहने लगता है। उसके लिए प्रेम और भावनाएं कोई मायने नहीं रखती। लेकिन उसे नहीं पता होता कि सेक्शुअल डिज़ीज़ेस का बड़ा कारण होती है ये लत। आपको बताएं कि एड्स के अलावा भी अनेक सेक्शुअल डिज़ीज़ेस बढ़ रही हैं। एक चौंकाने वाली बात ये है कि ये सेक्शुअल डिज़ीज़ेस कम उम्र के लोगों को ज़्यादा शिकार बना रही हैं। तो आप अपने परिवार और समाज पर सेक्शुअल डिज़ीज़ेस की छाया भी न पड़ने दीजिये।

इस तरह के क्राइम रोकना है ज़रूरी

अवसादग्रस्त और आक्रोशित ऐसा व्यक्ति आपे से बाहर होने लगता है। और यही से ये स्थिति बद से बदतर होती चली जाती है। ऐसे में कोई क्राइम होना साधारण बात है। अतेव सभी से आग्रह है कि अगर आपके साथ या आपके आसपास ऐसी कोई स्थिती देखें तो तुरंत चिकित्सीय परामर्श लें। जिससे बढ़ते क्राइम को रोका जा सके। विशेषज्ञों की राय से स्वयं एवं परिवार को बचाएं। सही समय पर सही निर्णय लें और अपना जीवन बचाएं।

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