ससुराल में गृहप्रवेश के साथ ध्यान रखें ये महत्वपूर्ण बातें

by | Aug 17, 2019 | Love & Life, Relationships | 0 comments

रिलेशनशिप्स से जुड़ना हर इंसान की ज़रूरत है। आप और हम तभी तो इस दुनिया में मनुष्य के रूप में काबिज़ हैं। न जाने कितने रिश्तों से हम सबका परिवार बंधा होता है। शादी के बाद हजारों सपने लिए एक लड़की अपने नए घर मतलब ससुराल में कदम रखती है। उसके मन में डर रहता है कि उसकी सास, ननद, जेठानी और अन्य सदस्य स्वभाव में कैसे होंगे? क्या वे उसे प्रेम से स्वीकारेंगे? विवाह के बाद अपने नए जीवन की शुरुआत करने के पहले आपको मानना होगा कि वह भी आपका परिवार है। अच्छी बहू बनकर प्यार से आप वहां भी हर किसी का दिल जीत सकती हैं। आइये इस बारे में आपको विस्तार से बताएं।

ज़रूरी है ससुराल का सही अर्थ समझना

विवाह एक संस्कार है जो दो परिवारों को मिलवाता है। इसमें कुछ नए रिश्ते भी बनते हैं। ये रिश्ते इतने नाज़ुक होते हैं कि छोटी-सी चूक से राख की तरह बिखर सकते हैं। यह एक लड़की के हाथों में होता है कि वह दोनों परिवारों के बीच संबंधों को मधुर रखे। इसके लिए शुरुआत उसे अपने आप से करनी होती है।

आप भी जब अपने ससुराल में विवाह करके आई होंगी तब आपके मन में भी डर होगा। हर सदस्य को खुश रखने की चिंता होगी। अपने नए परिवार के सभी सदस्यों के साथ रिश्तों को मधुर बनाने की चाहत होगी। एक लड़की को सिर्फ पति को ही नहीं, अपने ससुराल के सभी सदस्यों को दिल से अपनाना चाहिए। अपनी सास को मां समान मानना चाहिए और उन्हें वही सम्मान देना चाहिए जो अपनी मां मां को देती हैं। ससुराल में बहू की छोटी-सी चूक रिश्तों में कटुता ला सकती है। इसलिए ज़रूरी है कि वह हर कदम सोच-समझकर रखे।

पति के साथ ससुराल वालों की भी है ज़िम्मेदारी

ससुराल में सिर्फ बहू को ही नहीं, वहां के अन्य सदस्यों को भी रिश्ते मज़बूत बनाने की कोशिश करनी होती है। लड़की अपने घर को छोड़ एक नए घर में आई है, उन्हें यह बात समझने की ज़रूरत है। उन्हें भी रिश्ते मज़बूत बनाने के उतने ही प्रयास करने होंगे जितने लड़की कर रही है।

आमतौर पर होता है कि बहू की कभी अपने ससुराल वालों से छोटी बातों पर तकरार हो जाती है। यह समझने की ज़रूरत है कि न ससुराल वाले गलत होते हैं और न ही बहू। अधिकांश मामलों में बहू को ये समझाया जाता है कि इस घर पर उससे अधिक उनका अधिकार है। बहू को उनकी हर बात माननी होगी। लेकिन हर घर में ऐसा नहीं होता है। प्यार से इन छोटी-छोटी तकरारों को भी दूर कर एक-दूसरे के साथ रहा जा सकता है।

विवाह नए रिश्तों से परिचित करवाता है

एक लड़की को विवाह के बाद बहू, भाभी, देवरानी, व अन्य संबंधों को निभाना होता है। अपने हर संबंध को पूरा आदर दें व मन से उन्हें अपनाएं। विवाह का अर्थ ही है नए और सकारात्मक रिश्तों से जुड़ना। तो आप भी इस रिश्ते की अहमियत को समझिये।

समय के बदलाव के साथ सभी आधुनिक हुए हैं। अगर सास आधुनिक है तो वह आधुनिक बहू चाहती है। साथ ही वह चाहती है कि उसकी बहू पढ़ी-लिखी होने के साथ-साथ संस्कारी और पारंपरिक भी हो। वहीं बहू भी चाहती है कि उसकी स्वतंत्रता प्रभावित न हो। उसे नौकरी करने से न रोका जाए। ऐसे की कहानी अन्य रिश्तों से भी जुड़ी होती है।

केवल बहू नहीं आपकी दोस्त, सहेली और बेटी भी है

एक ससुराल में बहू खुद सास और ननद व अन्य रिश्तों के लिए सकारात्मक रवैया रखे। इससे रिश्तों में कटुता के लिए जगह ही नहीं बचेगी। सभी को एक-दूसरे को पूरे मन से अपनाना होगा। हर समस्या का आपस में बात कर हल निकालना होगा। यह रिश्ते की सफलता की कुंजी होती है। यदि सभी अपनी-अपनी ज़िम्मेदारी को समझते हुए छोटी बातों पर ध्यान रखेंगे तो अपने घर में स्वर्ग-सा वातावरण बना लेंगे।

ससुराल में एक नई वधू कैसे सामंजस्य रख सकती हैॽ इस विषय पर आधारित ये पोस्ट आपको पसंद आई हो तो इसे शेयर करें। कमेंट सेक्शन में अपने विचार लिखें और पोस्ट को रेटिंग देना न भूलें।

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