बर्थ कंट्रोल करने का आसान तरीका है नेचरल कॉन्ट्रासेप्शन

by | Aug 19, 2019 | Love & Life, Relationships | 0 comments

प्रेगनेंसी एंड पेरेंटिंग के तहत जुड़ी होती हैं एक पारिवार की खुशियां। स्त्री और प्रकृति एक-दूसरे के पूरक हैं। इसलिए स्त्री शरीर को प्रकृति से बेहतर कोई भी नहीं समझ सकता। प्रकृति के पास हर समस्या का समाधान है। स्त्री शरीर की जटिल संरचनाओं और व्याप्त व्याधियों एवं रोगपचार के लिए प्रकृति से बढ़कर कोई वैद्य नहीं। बर्थ कंट्रोल एक बहुत महत्वपूर्ण विषय है, खासकर महिलाओं के लिए। इसके लिए महिलाएं अनेक तरीके से कॉन्ट्रासेप्शन का प्रयोग करती हैं। आइये इस पोस्ट के द्वारा आपको कुछ प्राकृतिक उपायों से परिचित करवाते हैं।

प्राकृतिक बर्थ कंट्रोल के प्रयोग संबंधी आवश्यक बातें

प्राकृतिक बर्थ कंट्रोल तरीकों का प्रयोग करते समय अन्य गर्भनिरोधक दवाओं का प्रयोग नहीं किया जाता। इस दौरान सिर्फ मासिक चक्र को ध्यान में रखते हुए ‘सेफ पीरियड’ में ही सेक्स किया जाता है।

ज़रूरी है इन बर्थ कंट्रोल रूल्स को मानना

परिवार नियोजन के प्राकृतिक तरीकों में से एक सुरक्षित मासिक चक्र है। इस तरीके के तहत ओव्यूलेशन पीरियड के दौरान शारीरिक संबंध न रखने की सावधानियां बरती जाती है। आमतौर पर महिलाओं में अगला पीरियड शुरू होने के 14 दिन पहले ही ओव्यूलेशन होता है। ओव्यूलेशन के दौरान शुक्राणु व अंडे के फर्टिलाइज होने की ज़्यादा संभावना होती है, इसलिए गर्भधारण की संभावना बढ़ती है। शुक्राणु सेक्स के बाद 24 से 48 घंटे तक जीवित रहते हैं, ऐसे में गर्भधारण आसानी से हो जाता है। इसलिए इस तथ्य का ध्यान रखें।

महिलाएं बर्थ कंट्रोल के लिए एक कैलेंडर वॉच की परंपरागत तकनीक का पालन करती हैं। इसमें ओव्यूलेशन के संभावित समय को शरीर का टेम्परेचर चैक करके जाना जाता है। फिर उसी के अनुसार सेक्स करने या न करने का निर्णय लिया जाता है। इसमें महिलाओं को तकरीबन रोज़ ही अपने टैंप्रेचर को नोट करना होता है। जब ओव्यूलेशन होता है तो शरीर का तापमान आधा डिग्री बढ़ जाता है।

प्राकृतिक कॉन्ट्रासेप्शन क्या हैं?

प्राकृतिक पदार्थों के सम्मिश्रण जैसे फल-फूल, जड़-पत्ते, बीज-गिरी, घास-छाल, खनिज-लवण आदि से निर्मित अनेक औषध- रसायन होते हैं। इसके उपयोग से गर्भ न ठहर पाए ऐसी दवा को प्राकृतिक कॉन्ट्रासेप्शन कहते हैं। इस तरह प्राकृतिक तरीकों के उपयोग से परिवार-नियोजन हो जाता है। जो 100% सुरक्षित एवं असरकारक होता है, और इसका कोई दुष्प्रभाव भी नहीं होता।

घरेलू प्राकृतिक कॉन्ट्रासेप्शन

1. खट्टे फल

जी हां बर्थ कंट्रोल के लिए खट्टा फल काफी बेहतर विकल्प होता है। नींबू, आंवला और अमरुद में सिट्रिक एसिड काफी होता है, जो इसे खट्टा बनाता है। गर्भधारण से बचने के लिए शुद्ध विटामिन-सी के सेवन की सलाह दी जाती है, इसे खुराक के रूप में लेना चाहिए। असुरक्षित संभोग के तीन दिन बाद विटामिन-सी की दो खुराक लेनी चाहिए।

2. अजवाइन

गर्भ धारण करने से बचने के लिए अजवाइन काफी उपयोगी दवा है। इसके कोई दुष्प्रभाव नहीं होते हैं। इसके कारण यह सबसे बेहतर आयुर्वेदिक कॉन्ट्रासेप्शन बनता है।

3. लहसुन

पीरियड के बाद 2 लहसुन की कलियां छीलकर निगल जाएं तो यह बर्थ कंट्रोल में सहायक होंगी।

4. हल्दी की गांठ

ताज़ी, कच्ची या सूखी हल्दी इनमें से जो उपलब्ध हो उसे पीसकर छान लें। 6 ग्राम पाउडर को एक कप पानी के साथ दिन में 2 बार लें। यह एक अच्छा कॉन्ट्रासेप्शन हो सकता है। इसे भी लंबे समय से बर्थ कंट्रोल के रूप में प्रयोग किया जा रहा है।

5. पुदीना

अनचाहे गर्भ को धारण करने से रोकने के लिए पुदीना एक आसान उपाय है। कॉन्ट्रासेप्शन के तौर पर सदियों से इसका प्रयोग किया जाता है। चाहे पुदीने की पत्तियों को सुखाकर प्रयोग करें या सभी पत्तियों को पीसकर। पर ध्यान रहे मात्रा सीमित हो इसका अधिक प्रयोग हानिकारक भी सिद्ध हो सकता है।

6. नीम

नीम शुक्राणु नाशक बूटी है, जिसका प्रयोग प्राचीन काल से बर्थ कंट्रोल के लिए किया जा रहा है। इस भारतीय आयुर्वेदिक दवा को पत्तियों व उसके तेल के रूप में लिया जा सकता है।

हालांकि इससे शुक्राणु के उत्पादन में कोई प्रभाव नहीं होता। अनचाहें गर्भ से बचने के लिए पुरुष और स्त्री नीम की पत्तियों व तेल का सेवन कर सकते हैं। बर्थ कंट्रोल के लिए ये सेवन सीमित एवं तय मात्रा में करना चाहिए। साथ ही इसमें वैध/डॉक्टर की सलाह ज़रूरी है।

7. पपीता

असुरक्षित संभोग के बाद पपीता खाने से गर्भ धारण नहीं होता। पपीता निशेचन होने नहीं देता फलस्वरूप गर्भ को ठहरने से रोकता है। यह भी बर्थ कंट्रोल का बेहतर तरीका होता है। अगर गर्भ ठहरने के बाद पपीता खाया जाए तो, गर्भपात व अन्य समस्याओं की संभावना बढ़ जाती है।

8. सूखा अंजीर

अनचाहे गर्भ को रोकने के लिए अंजीर का प्रयोग प्राचीनकाल से किया जा रहा है। 1-2 सूखे अंजीर खाने से गर्भ नहीं ठहरता। अधिक मात्रा में अंजीर खाने से पेट खराब हो जाता है, इसलिए इसका प्रयोग सीमित मात्रा में करें।

इन प्राकृतिक पदार्थों का प्रभाव व्यक्ति विशेष पर अलग-अलग होता है। बर्थ कंट्रोल के लिए किसी भी उपाय को अपनाने से पहले सावधानी रखें। कई बार किसी को इससे बहुत जल्दी परिणाम मिलते हैं, तो किसी को देर से। हालांकि ये सब आपके शरीर की प्रकृति, खान-पान, अनुवांशिकी, रोग एवं अन्य शारीरिक कारणों पर निर्भर करता है। पर बहुदा इसके सकारात्मक परिणाम ही देखे गए हैं। अगर शारीरिक अनिवार्यता (मेडिकल इमरजेंसी) है तो इनका प्रयोग ध्यान से करें।

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