स्मोकिंग और प्रेग्नेंसी : बच्चे के जीवन पर बढ़ता खतरा

by | Oct 24, 2019 | Love & Life, Parenting | 0 comments

पेरेंटिंग से जुड़ना हर कपल के लिए एक नया और अभूतपूर्ण अनुभव होता है। लेकिन मां के लिए ये एक सुखद अनुभूति के साथ बड़ा दायित्व भी होता है। ऐसा नहीं है कि पिता के लिए बच्चे का होना ज़िम्मेदारी नहीं लाता। लेकिन मां तो आखिर मां ही होती है। तभी तो प्रेग्नेंसी में होने वाली मां की ज़िम्मेदारी और बढ़ जाती है। अगर मां को स्मोकिंग करने की आदत हो तो इससे उसे और बच्चे दोनों को नुकसान हो सकता है। फ़ीटस मतलब भ्रूण अनेक परेशानियों से घिर सकता है। इससे फीटल डेवलपमेंट भी प्रभावित होता है। यही नहीं इससे मां और बच्चे को कैंसर होने का खतरा भी बढ़ जाता है। मां अगर गर्भावस्था में धूम्रपान करना नहीं छोड़ती तो इससे प्रीमेच्योर बेबी की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा स्मोकिंग की वजह से स्टिलबर्थ के मामले भी बढ़ जाते हैं। आइये जानते हैं कि स्मोकिंग से मां और बच्चे को और क्या समस्याएं होती हैं?

संभव है कि महिला प्रेग्नेंसी से पहले भी धूम्रपान करती हो

कुछ महिलाएं चेन स्मोकर होती हैं। स्मोकिंग की लत उन्हें बहुत कम उम्र से हो सकती है। इससे शादी के बाद भी उनकी ये आदत नहीं छूटती है। फिर जब वो मां बनने वाली होती हैं तो भी उनके लिए स्मोकिंग छोड़ना मुश्किल होता है। ऐसे में उनके होने वाले बच्चे के लिए मुसीबत खड़ी हो जाती है। अगर कोई महिला पहले से स्मोकिंग करती भी है तो प्रेग्नेंसी में उसे ये आदत छोड़ना चाहिए।

प्रेग्नेंसी में अनेक बीमारियों का कारण बन सकता है धूम्रपान

शायद कोई महिला इसे इतनी सीरियसली न ले। खासकर वो जिन्हें स्मोकिंग की आदत है। लेकिन जब इसके परिणाम सामने आते हैं तो वो बहुत डरावने होते हैं। प्रेग्नेंसी के दौरान लगातार धूम्रपान करने से मां और बच्चे में कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। प्रेग्नेंसी में अगर आप स्मोकिंग बंद नहीं करती हैं तो इससे बच्चे की जान को खतरा भी हो सकता है। इससे बच्चे में जन्मजात विकृतियां भी हो सकती हैं।

फ़ीटस की स्थिति स्मोकिंग से बहुत ज़्यादा खराब हो सकती है

जी हां भ्रूण मतलब फ़ीटस की दशा तब बहुत खराब हो जाती है जब मां स्मोकिंग नहीं छोड़ती। इससे फ़ीटस के क्रमागत विकास में भी बाधा उत्पन्न होती है। फ़ीटस का बढ़ना उसके मां के द्वारा ग्रहण की हुई हर चीज़ पर निर्भर करता है। इसलिए आप समझ ही सकते हैं कि स्मोकिंग का उस पर क्या असर होगा।

प्रीमेच्योर बेबी पैदा हो सकता है

इसके दुष्परिणामों की अभी तो महज़ शुरुआत हुई है। स्मोकिंग का एक और बुरा रिजल्ट है प्रीमेच्योर बेबी का जन्म। जी हां प्रेग्नेंसी में लगातार स्मोकिंग करने से प्रीमेच्योर बेबी होने की संभावना बढ़ जाती है। विदेशों में तो आजकल प्रीमेच्योर बेबी की संख्या बहुत ज़्यादा बढ़ चुकी है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण स्मोकिंग ही माना जाता है। क्योंकि वहां की महिलाओं को इसकी बहुत ज़्यादा आदत होती है।

कैंसर का कारण बन सकती है स्मोकिंग

जी हां स्मोकिंग से उपजने वाली सबसे बड़ी बीमारी है कैंसर की। कैंसर के कारण न जाने कितने लोग अपनी जान से हाथ धो बैठते हैं। कैंसर से होने वाली मौतों में एक बहुत बड़ी संख्या स्मोकिंग के कारण होने वाले कैंसर की है। इसलिए अपनी इस लत को जितनी जल्दी छोड़ दिया जाये अच्छा है।

फीटल डेवलपमेंट पर पड़ता है सबसे ज़्यादा असर

मां जब धूम्रपान करती है तो उससे फीटल डेवलपमेंट पर सबसे अधिक असर होता है। फीटल डेवलपमेंट की प्रक्रिया बहुत धीमी हो जाती है। कभी-कभी फीटल डेवलपमेंट की प्रक्रिया रुक भी जाती है। इस दौरान तो जितना अच्छी चीज़ें आप सेवन कर सकती हैं वो करिए। लेकिन ऐसा कुछ सेवन मत कीजिये जिससे आपके होने वाले बच्चे पर गलत प्रभाव हो।

स्टिलबर्थ के मामले भी बढ़ रहे हैं

जन्म लेने से पहले ही शिशु की मौत को स्टिलबर्थ के नाम से जाना जाता है। स्टिलबर्थ के मामले इन दिनों काफी बढ़ रहे हैं और इसमें एक बड़ा हाथ स्मोकिंग का है। स्टिलबर्थ को रोका जाना संभव है यदि मां अपने और बच्चे की सुरक्षा के बारे में सोचे तो।

तो अब तो आपको पता चल ही गया होगा कि प्रेग्नेंसी में स्मोकिंग करने से मां और बच्चे को कितना नुकसान पहुंच सकता है। गर्भावस्था में स्मोकिंग कितना नुकसान पहुंचा सकती है। इस विषय पर आधारित ये पोस्ट आपको पसंद आई हो तो इसे शेयर करें। कमेंट सेक्शन में अपने विचार लिखें और पोस्ट को रेटिंग देना न भूलें।

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