सिंगल चाइल्ड की देखभाल में आ सकती हैं ये परेशानियां

by | Sep 22, 2020 | Love & Life, Parenting | 0 comments

पेरेंटिंग के इस सेक्शन में आज हम बात करेंगे सिंगल चाइल्ड की परवरिश के बारे में। जी हां आजकल लोगों में सिंगल चाइल्ड को लेकर एक अलग नज़रिया देखने को मिल रहा है। लोग एक बच्चे को लेकर ही अपने भविष्य को ज्यादा सुरक्षित मान रहे हैं। ऐसा करना सही भी है। क्योंकि जीवन में जिस तरह से सुविधाएं बढ़ रही हैं उसी तरह से इंसान को अनेक सुविधाओं को जुटाने के लिए परिश्रम करना पड़ता है। यही कारण है कि लोग अपने परिवार को सीमित रखना चाहते हैं। बड़े परिवार के साथ आती है ढेर सारी परेशानियां और आपको उतनी ही अधिक सुविधाएं भी जुटाना पड़ती हैं। अकेले बच्चे के साथ परिवार का संतुलन में चलना आसान होता है। जब एक बच्चे को इस दुनिया में लाया जाता है तो उसके साथ बच्चे की परवरिश को लेकर भी अनेक जिम्मेदारी आती हैं। इन जिम्मेदारियों में बच्चों का स्वास्थ्य, सुरक्षा, संस्कार और सकारात्मक माहौल भी आता है। बच्चों की फिटनेस बनी रहे, वह एक अच्छा जीवन जियें ये आवश्यक होता है। लेकिन अकेले बच्चे को पालना भी इतना आसान नहीं। क्योंकि अकेले बच्चे अक्सर इंट्रोवर्ट हो जाते हैं। ऐसे में उनकी देखभाल और भी ज्यादा जरूरी हो जाती है। आइए जानते हैं कि अपने इकलौते बच्चे को किस तरह से प्यार और देखभाल दें।

हठी बन जाते हैं सिंगल चाइल्ड

जब बच्चा अकेला होता है तो सारा ध्यान माता-पिता उसी पर देते हैं। सिंगल चाइल्ड को हर चीज़ आसानी से मिल जाती है। वो परिवार में सबके आकर्षण का केंद्र होता है। लेकिन जब किसी वजह से माता-पिता उसे उसकी पसंद की चीज नहीं दे पाते तो वह बहुत ही ज़िद्दी बन जाता है। रोकर या कुछ अन्य तरह से वह अपनी हर फ़रमाइश को पूरा करवाता है। इसलिए यदि आपका भी सिंगल चाइल्ड है तो आप उसकी हर बात को मानना छोड़ दीजिए। हठी बनकर बच्चे का नुकसान ही होगा। साथ ही आपकी समस्या भी बढ़ेगी।

सिंगल चाइल्ड को सिखाइये शेयरिंग

देखा जाता है कि सिंगल चाइल्ड में शेयरिंग की भावना कम होती है। वह सारा प्यार और उपहार अकेले पाता है। इसलिए दूसरों के साथ अपनी चीजों को बांटने का क्या मज़ा होता है वह नहीं जानता। शुरुआत से ही सिंगल चाइल्ड को दूसरे बच्चों के साथ शेयरिंग की आदत डालना चाहिए। इससे सिंगल चाइल्ड दूसरे बच्चों के साथ ज़्यादा घुलेगा और मिलेगा। फिर उसका अकेलापन भी कम होगा और वो समाज में खुद को स्थापित करना भी सीख पायेगा।

ज़्यादा प्यार न लुटाएं, बच्चे की फिटनेस है ज़रुरी

आपने देखा होगा और हो सकता है आपके परिवार में भी सिंगल चाइल्ड को लेकर माता-पिता कुछ ज्यादा ही ध्यान रखते हैं। कहने का अर्थ है कि माता-पिता अपना सारा लाड़-प्यार खाने के रूप में दर्शाते हैं। बच्चे को ठूंस-ठूंस कर खिलाया जाता है। इसके अलावा जब बच्चा फरमाइश करता है तो माता-पिता उसे बाहर का खाना भी लाकर देते हैं। खासकर जंक फूड का तो बच्चा शौकीन बन जाता है। ऐसे में उसकी फिटनेस को बरकरार रखना बहुत मुश्किल होता है। इसी कारण सिंगल चाइल्ड में वेट बढ़ने की समस्या देखी जाती है। फिटनेस नहीं होने के कारण वह अक्सर बाकी बच्चों से पीछे रहता है। खेलने में उसका ध्यान नहीं होता, अपना कोई भी काम बच्चा मन लगाकर नहीं कर पाता। इसलिए बच्चे की फिटनेस को बरकरार रखना है तो उसे पौष्टिक और संतुलित भोजन करवाएं। कभी-कभी बच्चा जंक फूड की मांग करता है तो महीने में एक या दो बार उसे जंक फूड दिया जा सकता है।

अपने बच्चे को इंट्रोवर्ट होने से बचाएं

परिवार में सिंगल चाइल्ड अक्सर अकेलेपन का शिकार हो जाता है। क्योंकि उसके साथ ना तो कोई भाई होता है ना बहन और यदि माता-पिता भी सर्विस करते हैं तो फिर तो अकेलापन और भी बढ़ जाता है। ऐसे में बच्चा इंट्रोवर्ट हो सकता है। वैसे इंट्रोवर्ट होना कोई बुरी बात नहीं है लेकिन आगे जाकर आपके बच्चे को कुछ समस्याएं आ सकती हैं। इंट्रोवर्ट बच्चा खुलकर अपनी बात सामने नहीं रख पाता। वह किसी से भी बात करने में झिझकता है। उसके दोस्त नहीं होते यहां तक कि वह अपने पेरेंट्स के साथ भी अपनी बात को बांट नहीं पाता। इसलिए अपने बच्चे को इंट्रोवर्ट होने से बचाएं। उसे समय दें और सामाजिक बनाएं।

तो इस तरह आप सिंगल चाइल्ड की देखभाल अच्छे से कर सकते हैं।

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