इंटरकोर्स के समय महिलाओं के दिमाग में चलती हैं ये बातें

by | Jul 21, 2020 | Love & Life, Sex | 0 comments

सेक्स का प्रभाव महिला और पुरुष पर अलग-अलग प्रकार से होता है। हालांकि ये दोनों के लिए संतुष्टि का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, लेकिन इंटरकोर्स का नज़रिया दोनों के लिए थोड़ा बदला है। जहां पुरुष अमूमन एक एक्टिव पार्टनर के रूप में नज़र आते हैं। वहीं महिलाओं की सक्रियता को इस दौरान निष्क्रिय मान लिया जाता है। वो साथ दें तो गलत, न दें तो भी गलत। इस चराचर का नियम है, एक वैचारिक स्थायित्व, समान संयोजन। लेकिन ये सब केवल प्रकृति तक सीमित है, मनुष्य तक नहीं। क्या कीजियेगा? अब जो नियम हमने बना लिए वो पत्थर की लकीर हो गए। इसलिए शायद महिलाएं शारीरिक आकर्षण को प्रेम की सार्थकता मान बैठीं। जबकि पुरुषों के लिए ये अहम और संतुष्टि का एक समानार्थक विचार ही रहा। हां तो कहीं आप ये न सोच बैठें कि हम विषय को यूं ही नाहक भटका रहे हैं। बिलकुल नहीं, हम आपको बताएंगे कि सामान्य रूप से एक महिला पार्टनर के साथ अंतरंग होते हुए किन विचारों में डूबी होती है। हो सकता है वो ये सोच रही हो कि उसे ऑर्गेज़्म मिलेगा या नहीं? या फिर वो कहीं प्रेग्नेंसी की संभावना को तलाश रही हो। आइये इस बारे में थोड़ी और पड़ताल करें।

कई बार इंटरकोर्स महज़ बन जाता है एक औपचारिकता

अब इसमें किसी को दोष देना ठीक नहीं है। कई बार परिस्थिति ही ऐसी आ जाती है कि इंटरकोर्स बस दो व्यक्तियों के बीच एक भुलावा बन जाता है। उन्हें लगता है वो करीब हैं, संतुष्ट हैं, खुश हैं। जबकि ऐसा होता नहीं है। इंटरकोर्स आपके जीवन में आंतरिक और शारीरिक आवश्यकता को सुनिश्चित करता है। अब ऐसा कहा जाता है कि इंटरकोर्स एक समय के बाद नीरस हो जाता है। अगर ऐसा है तो फिर हमे खाना भी नीरस लगना चाहिए। सोना भी नीरस लगना चाहिए, लेकिन ऐसा कहां होता है। फिर इंटरकोर्स के साथ ऐसा क्यों? बस इसे जीना सीखिए, अपने लिए, अपने साथी के लिए।

अपने शरीर को लेकर कॉन्शयस रहती हैं महिलाएं

ये बात तो जगज़ाहिर है कि महिलाएं अपने शरीर को लेकर हर समय सोचती हैं। यहां तक कि इंटरकोर्स के समय भी वो शरीर की बनावट को लेकर ही विचार मग्न रहती हैं। ऐसा तो नहीं कि मैं मोटी लग रही हूं, मेरा पार्टनर मेरे शरीर को लेकर क्या सोचता होगा? इस तरह की तमाम बातें महिला के दिमाग में खलबली मचाती रहती हैं। कहने का मतलब है कि वो इंटरकोर्स के समय भी पार्टनर के साथ होते हुए भी साथ नहीं होती। वैसे भी महिलाएं अपने लुक्स को लेकर बहुत फिक्रमंद होती हैं। इसलिए यदि वो इंटरकोर्स के समय भी शरीर के बारे में सोचती हैं तो कोई बड़ी बात नहीं।

प्रेग्नेंसी का डर भी बना रहता है महिलाओं के दिमाग में

हर महिला को प्रेग्नेंसी का डर बना रहता है जब वो बिना किसी प्रोटेक्शन के इंटरकोर्स करते हैं। खासकर वो दिन जब महिला के प्रेग्नेंट होने की संभावना ज़्यादा होती है। हालांकि आजकल तो अनवांटेड प्रेग्नेंसी को लेकर कई तरीके निकाले जा चुके हैं। इसके लिए सबसे ज़्यादा लोगों में मतलब पार्टनर में सामंजस्य होना बहुत ज़रूरी है। प्रेग्नेंसी से बचने के लिए कंडोम के अलावा और भी सुरक्षित उपाय अपनी सुविधा के अनुसार आप इस्तेमाल कर सकते हैं।

ऑर्गेज़्म का सपना दिमाग में चलता रहता है

हर महिला की एक ही चाह होती है कि वो कैसे भी ऑर्गेज़्म को पा ले। क्योंकि महिलाओं के लिए ऑर्गेज़्म ही संतुष्टि का पर्याय होता है। संबंधों में पूर्णता को तलाशती महिलाएं सिर्फ एक ही परिभाषा जानती हैं और वो है ऑर्गेज़्म पाना। आप जानती हैं इसी से आपके जीवन में प्रेम संबंधों की जीवटता बनी रहती है। तो संभव है कि महिलाओं में इंटरकोर्स के समय भी ऑर्गेज़्म को पाने की चाह दिमाग में बनी रहती होगी।

इसके अलावा परिवार, बच्चे और नौकरी से जुड़ी बातों में भी महिलाओं का दिमाग लगा रहता है। अब यह सही है या गलत कहना थोड़ा मुश्किल है। बाकी आप समझदार हैं निर्णय आपको करना है।

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