क्या करें जब बच्चा ज़्यादा वेट गेन कर ले?

by | Jan 10, 2020 | Love & Life, Parenting | 0 comments

पेरेंटिंग में आप जितना संभव हो सके अच्छी देखभाल का प्रयास करते हैं। लेकिन उसके बाद भी कुछ परेशानियां सामने आ ही जाती हैं। जैसे आजकल एक विकराल समस्या खड़ी हो गई है। क्या समझ गये आप? जी हां चाइल्ड फैट, बच्चों में बढ़ता मोटापा एक चिंताजनक स्थिति है। कहने को ये बात जितनी आसान है, इसे सुलझाना उतना ही मुश्किल होता है। क्यों होता है बच्चों का वेट गेन? इसका कारण कहीं न कहीं आपके लाड़-प्यार से ही जुड़ा होता है। बच्चों ने जंक फ़ूड की इच्छा ज़ाहिर की आपने उसे पूरा किया। इसके बाद उनकी कम होती फिज़िकल एक्टिविटी भी बढ़ते मोटापे का कारण हो सकती है। बच्चे आजकल दिन-भर टीवी और मोबाइल गेम्स में लगे रहते हैं। कारण तो अनेक हैं बच्चों में फैट के बढ़ने के लेकिन शायद हम इस ओर इतना ध्यान नहीं देते हैं। आइये जानते हैं कि इस समस्या को कैसे दूर किया जा सकता है।

शुरू से ही न होने दें वेट गेन

अगर आपका बच्चा शुरुआत से ही फिट और सेहतमंद रहेगा तो उसका भविष्य भी अच्छा होगा। अनेक संभावित बीमारियों से वो बचे रहेंगे। साथ ही शरीर में स्फूर्ति और चुस्ती भी बनी रहेगी। क्योंकि एक बार वेट गेन होने से उसे कम करना उतना ही मुश्किल होता है। और यदि बच्चा प्रारंभ से ही मोटापे से जुड़ी बीमारियों का शिकार हो जाएगा तो क्या शेष रह जायेगा। इसलिए बच्चे को फिट बनायें उसका वेट गेन न होने दें।

कम उम्र में वेट गेन से होती हैं अनेक समस्याएं

जब कम उम्र में बच्चों में फैट बढ़ता है तो उनको शारीरिक परेशानियां भी होती हैं। लेकिन लोग उसे बच्चा कहकर टाल देते हैं। लेकिन वो नहीं जानते कि ये फैट, ये मोटापा आगे चलकर कितना खतरनाक साबित होगा। यही नहीं अधिक वेट गेन के कारण बच्चे अनेक चीज़ों में दूसरे बच्चों से पिछड़ जाते हैं। इसका दोषी आप किसे ठहराएंगे? इसलिए ज़रूरी है कि आप शुरु से ही बच्चों की फिटनेस की ओर ध्यान दें।

पौष्टिक आहार से दूरी बढ़ाती है फैट को

सच बात तो ये है कि शुरू से ही बच्चों की डाइट पर ध्यान दें तो कोई समस्या ही न हो। क्योंकि बच्चे तो वही खाना पसंद करते हैं जो उनकी ज़ुबान को अच्छा लगता है। लेकिन पेरेंट्स होने के नाते तो आपका कर्तव्य बनता है कि उन्हें सही पोषण दें। इसके लिए आपको मेहनत भी करना ही होगी। शुरू से ही बच्चों को समय पर और सही खाने की आदत डालें। इससे बच्चे स्वस्थ भी रहेंगे और उनका फैट भी बढ़ेगा नहीं।

सॉफ्ट ड्रिंक की आदत न डालें बच्चों को

आप कहीं बाहर घूमने गये या फिर घर पर ही अक्सर बच्चे सॉफ्ट ड्रिंक या कोल्डड्रिंक की मांग करते हैं। उनकी डिमांड हुई नहीं और आप हाज़िर कर देते हैं कोल्डड्रिंक को। बिना ये जाने या समझे कि इससे बच्चे की सेहत पर क्या असर हो सकता है। आपको बता दें कि सॉफ्ट ड्रिंक में आर्टिफीशियल स्वीटनर होता है। जो आपको कोई फायदा तो नहीं पहुंचाता बल्कि केवल फैट बढ़ाता है। आप कोशिश करें कि सॉफ्ट ड्रिंक की जगह आप बच्चे को रियल ज्यूस दें। इसके अलावा हमारे पारंपरिक पेय जैसे छाछ, लस्सी, नींबू पानी दें। इससे उन्हें नुकसान भी नहीं होगा और उनकी अच्छी आदत भी हो जायेगी।

जंक फ़ूड से दूर रहने में ही है भलाई

पिज़्ज़ा, बर्गर, चायनीज़ और न जाने कितनी तरह के जंक फ़ूड बच्चों की पसंद बन चुके हैं। यहां भी आपकी भूल ही साबित होती है। क्योंकि जंक फ़ूड तो बच्चों को तब ही मिलेगा जब आप उन्हें लाकर देंगे। महीने में एक-दो बार जंक फ़ूड खाने में कोई बुराई नहीं है। लेकिन यदि बच्चे को जंक फ़ूड की आदत लग जाये तो फिर समस्या हो सकती है। फैट को कम करने के लिए बच्चों को घर का बना खाना ही दीजिये।

बच्चों को शामिल करें फिज़िकल एक्टिविटी में

पहले के समय के बारे में सोचा जाये तो उसके मुकाबले बच्चों की फिजिकल एक्टिविटी में कमी आई है। उसकी जगह टीवी और कंप्यूटर गेम्स ने ले ली है। बच्चे पार्क में जाकर किसी तरह की फिजिकल एक्टिविटी में इन्वॉल्व नहीं होते हैं। इससे उनमें एनर्जी की कमी भी रहती है और मोटापा भी बढ़ता है। फिजिकल एक्टिविटी की कमी बच्चों में अनेक नकारात्मक संभावनाओं को भी जन्म देती है। क्योंकि ऐसा होने पर उन्हें दूसरे बच्चों के साथ घुलने-मिलने का मौका नहीं मिलता। इससे बच्चे नकारात्मकता के शिकार भी होते जाते हैं। इसलिए बच्चों को बाहर खेलने ज़रूर भेजना चाहिए।

मोबाइल गेम्स से दूर रखें बच्चों को

आजकल बच्चों को मोबाइल गेम्स की एक नई बीमारी लग गई है। उनका दिन-भर मोबाइल गेम्स खेलते ही बीतता है। खाना खाते समय भी बिना मोबाइल गेम्स के उनका खाना गले से नीचे नहीं उतरता। इससे उन्हें ये अंदाज़ा भी नहीं रहता कि उन्होंने कितना खाया और क्या खाया। फिर पेरेंट्स भी इस ओर ज़्यादा ध्यान नहीं देते हैं। तो ज़रूरी है कि इस बारे में ज़रूरी कदम उठाये जाएं और अपने बच्चों को सेहतमंद बनायें।

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